Raag Sriraag•Guru Nanak Dev ji•Ang 24
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Siree Raag, First Mehl, Fourth House:
He is the Master who has made the world bloom; He makes the Universe blossom forth, fresh and green.He holds the water and the land in bondage. Hail to the Creator Lord! ||1||
Death, O Mullah-death will come,So live in the Fear of God the Creator. ||1|| Pause ||
You are a Mullah, and you are a Qazi, only when you know the Naam, the Name of God.You may be very educated, but no one can remain when the measure of life is full. ||2||
He alone is a Qazi, who renounces selfishness and conceit, and makes the One Name his Support.The True Creator Lord is, and shall always be. He was not born; He shall not die. ||3||
You may chant your prayers five times each day; you may read the Bible and the Koran.Says Nanak, the grave is calling you, and now your food and drink are finished. ||4||28||
Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)
जिस मालिक ने सारा जगत प्रफुल्लित किया है, जिस ने सारे संसार को हरा-भरा किया है, जिसने पानी और मिट्टी (विरोधी तत्व) इकट्ठे करके रख दिए हैं, वह निर्माता धन्य है (उसकी महिमा करो), वही (असल) मालिक है (मौत का मालिक भी वही है, विरोधी तत्वों वाली खेल आखिर खत्म होनी है, और वही खत्म करता है)।1।
हे मुल्ला! मौत (का डर) हरेक के सिर पर है, इस वास्ते रब से ही डरना चाहिए (रब के डर में रहना ही फबता है। अर्थात, रब के डर में रहने से मौत का डर दूर हो सकता है)।1। रहाउ।
(सिर्फ मजहबी किताबें पढ़ लेने से असली काजी-मुल्ला नहीं बन सकते) तभी तू अपने आप को मुल्ला समझ और तभी काजी, जब तू रब के नाम के साथ गहरी सांझ पा लेगा (और मौत का डर खत्म कर लेगा, नही तो) चाहे तू कितनी ही (मजहबी किताबें) पढ़ जाएं (मौत फिर भी नहीं टलेगी), जब स्वास पूरे हो जाते है, कोई यहां रह नहीं सकता।2।
वही मनुष्य काजी है जिसने स्वैभाव त्याग दिया है, और जिसने उस रब के नाम को अपनी जिंदगी का आसरा बनाया है। जो अब भी है, आगे भी रहेगा। जो ना जन्मता है ना ही मरता है। जो सदा कायम रहने वाला है और सभ को पैदा करने वाला है।3।
(हे काजी!) तू पाँचों वक्त नमाज़ पढ़ता है, तू कुरान व अपनी अन्य मजहबी किताबें भी पढ़ता है (फिर भी स्वार्थ में बंधा रह के मौत से डरता है)। नानक कहता है (हे काजी!) जब मौत आवाज देती है तो दाना-पानी यहीं का यहीं धरा धराया रह जाता है (सो, मौत के डर से बचने के लिए रब के डर में टिका रह)।4।28।
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