Raag sriraag•Guru Nanak Dev ji•Ang 17
- Get link
- X
- Other Apps
Siree Raag, First Mehl:
The virtuous wife exudes virtue; the unvirtuous suffer in misery.If you long for your Husband Lord, O soul-bride, you must know that He is not met by falsehood.No boat or raft can take you to Him. Your Husband Lord is far away. ||1||
My Lord and Master is Perfect; His Throne is Eternal and Immovable.One who attains perfection as Gurmukh, obtains the Immeasurable True Lord. ||1|| Pause ||
The Palace of the Lord God is beautiful. Within it are flawless diamonds,gems, rubies and pearls. A fortress of gold surrounds this Source of Nectar.How can I climb up to the Fortress without a ladder? By meditating on the Lord, through the Guru, I am blessed and exalted. ||2||
The Guru is the Ladder, the Guru is the Boat, and the Guru is the Raft to take me to the Lord's Name.The Guru is the Boat to carry me across the world-ocean; the Guru is the Sacred Shrine of Pilgrimage, the Guru is the Holy River.If it pleases Him, I bathe in the Pool of Truth, and become radiant and pure. ||3||
He is called the Most Perfect of the Perfect. He sits upon His Perfect Throne.He looks so Beautiful in His Perfect Place. He fulfills the hopes of the hopeless.O Nanak, if one obtains the Perfect Lord, how can his virtues decrease? ||4||9||
Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)
जिस जीव-स्त्री ने अपने हृदय में प्रभु की महिमा बसाई हई है वह प्रभु के गुणों की ही कथा वारता करती है। पर, जिसके अंदर (माया के मोह के कारण) औगुण ही औगुण हैं वह (अपने ही औगुणों के प्रभाव से) सदा चिंतातुर रहती है। हे जीव-स्त्री! तू प्रभु पति को मिलना चाहती है, तो (याद रख कि) झूठे मोह में फसे रहने से प्रभु-पति को नहीं मिल सकती। (तू तो मोह के समुंदर में गोते खा रही है) तेरे पास ना बेड़ी (नाव) है ना तुलहा है, इस तरह प्रभु पति नहीं मिल सकता, (क्योंकि) वह तो (इस संसार समुंदर से पार है) दूर है।1।
मेरे पालनहार प्रभु का अहिल ठिकाना उस तख्त पर है जो (प्रभु की तरह ही) संपूर्ण है (जिसमें कोई कमी नहीं है)। वह प्रभु सदा स्थिर रहने वाला है, उसका तौल माप बताया नहीं जा सकता। पूरा गुरु यदि मेहर करे, तोही वह मिल सकता है।1। रहाउ।
हरि प्रमात्मा (मानों) एक खूबसूरत सा मन्दिर है जिसमें माणक लाल मोती व चमकते हीरे हैं (जिसके चारों तरफ) सोने के सुन्दर किले हैं। पर उस (मंदिर) किले पर सीढ़ी के बिना चढ़ा नही जा सकता। हाँ, यदि गुरु चरणों का ध्यान धरा जाए, जो प्रभु चरणों का ध्यान धरा जाए, तो दर्शन हो जाता है।2।
उस (हरि मंदिर किले के ऊपर चढ़ने के लिए) गुरु सीढ़ी है। (इस संसार समुंदर से पार लांघने के वास्ते) गुरु नाव है, प्रभु का नाम (देने वाला) गुरु तुलहा है। गुरु सरोवर है, गुरु समुंदर है, गुरु ही जहाज है, गुरु ही तीर्थ है, और दरिया है। यदि प्रभु की रजा हो, तो (गुरु को मिल के) मनुष्य की बुद्धि शुद्ध हो जाती है। (क्योंकि) मनुष्य साधु-संगत सरोवर में (मानसिक) स्नान करने जाने लग पड़ता है।3।
हर कोई कहता है कि परमात्मा में कोई कमी नही है, उसका निवास भी ऐसे तख्त पर है जिसमें कोई कमी नहीं है। वह पूरा प्रभु सुंदर कमी रहित जगह पर बैठा हैऔर टूटे दिल वालों की उम्मीदें पूरी करता है। हे नानक! वह पूर्ण प्रभु अगर मनुष्य को मिल जाए तो उसके गुणों में भी कैसे कोई कमी आ सकती है? 4।9।
- Get link
- X
- Other Apps
Comments
Post a Comment