Japji sahib•Guru Nanak Dev ji•Ang 5
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japji sahib pauree 25:
His Blessings are so abundant that there can be no written account of them.The Great Giver does not hold back anything.There are so many great, heroic warriors begging at the Door of the Infinite Lord.So many contemplate and dwell upon Him, that they cannot be counted.So many waste away to death engaged in corruption.So many take and take again, and then deny receiving.So many foolish consumers keep on consuming.So many endure distress, deprivation and constant abuse.Even these are Your Gifts, O Great Giver!Liberation from bondage comes only by Your Will.No one else has any say in this.If some fool should presume to say that he does,He shall learn, and feel the effects of his folly.He Himself knows, He Himself gives.Few, very few are those who acknowledge this.One who is blessed to sing the Praises of the Lord,O Nanak, is the king of kings. ||25||
Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)
उसके उपकार इतने अधिक हैं कि उनको लिखने की समर्था किसी में भी नहीं ।वह अनेक बख्शिशें करने वाला होने के कारण बड़ा है किंतु उसे लोभ तिनका मात्र भी नहीं है ।कई अनगिनत शूरवीर उसकी कृपा-दृष्टि की चाहना रखते हैं ।उनकी संख्या की तो बात ही नहीं हो सकती ।कई मानव निरंकार द्वारा प्रदत पदार्थों को विकारों हेतु भोगने के लिए जूझ-जूझ कर मर जाते हैं ।कई अकाल पुरुष द्वारा दिए जाने वाले पदार्थों को लेकर मुकर जाते हैं ।कई मूढ़ व्यक्ति परमात्मा से पदार्थ ले लेकर खाते रहते हैं, कभी उसे स्मरण नहीं करते ।कईयों को दुख व भूख की मार सदैव पड़ती रहती है, क्योंकि यह उनके कर्मों में ही लिखा होता है ।किन्तु ऐसे सज्जन ऐसी मार को उस परमात्मा की बख्शिश ही मानते हैं ।इन्हीं कष्टों के कारण ही मानव जीव को वाहिगुरु का स्मरण होता है ।मनुष्य को माया-मोह के बंधन से छुटकारा भी ईश्वर की आज्ञा में रहने से ही मिलता है ।इसके लिए कोई अन्य विधि हो, कोई भी नहीं कह सकता; अर्थात्-ईश्वर की आज्ञा में रहने के अतिरिक्त माया के मोह-बंधन से छुटकारा पाने की कोई अन्य विधि कोई नहीं बता सकता ।यदि अज्ञानता वश कोई व्यक्ति इसके बारे में कथन करने की चेष्टा करे तो फिर उसे ही मालूम पड़ेगा कि उसे अपने मुँह पर यमों आदि की कितनी चोटें खानी पड़ी हैं ।परमात्मा संसार के समस्त प्राणियों की जरूरतों को जानता है और उन्हें स्वयं ही प्रदान भी करता है ।संसार में सभी जीव कृतध्न ही नहीं हैं, कई व्यक्ति ऐसे भी हैं जो इस बात को मानते हैं,परमात्मा प्रसन्न होकर जिस व्यक्ति को अपनी स्तुति को गाने की शक्ति प्रदान करता है ।
हे नानक ! वह बादशाहों का भी बादशाह हो जाता है ; अर्थात्- उसे ऊँचा व उत्तम पद प्राप्त हो जाता है॥ २५ ॥
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Comments
Waheguru ji
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