japji sahib•Guru Nanak Dev ji•Ang 2,3
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japji sahib pauree 8,9:
Listening-the Siddhas, the spiritual teachers, the heroic warriors, the yogic masters.Listening-the earth, its support and the Akaashic ethers.Listening-the oceans, the lands of the world and the nether regions of the underworld.Listening-Death cannot even touch you.O Nanak, the devotees are forever in bliss.Listening-pain and sin are erased. ||8||
Listening-Shiva, Brahma and Indra.Listening-even foul-mouthed people praise Him.Listening-the technology of Yoga and the secrets of the body.Listening-the Shaastras, the Simritees and the Vedas. O Nanak, the devotees are forever in bliss.Listening-pain and sin are erased. ||9||
Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)
परमात्मा का नाम सुनने, अर्थात्-उसकी कीर्ति में अपने हृदय को लगाने के कारण ही सिद्ध, पीर, देव तथा नाथ इत्यादि को परम-पद की प्राप्ति हुई है।नाम सुनने से ही पृथ्वी, उसको धारण करने वाले वृषभ (पौराणिक धर्न ग्रन्थों के अनुसार जो धौला बैल इस भू-लोक को अपने सीगों पर टिकाए हुए है) तथा आकाश के स्थायित्व की शक्ति का ज्ञान प्राप्त हो जाता है।नाम सुनने से शाल्मलि, क्रौंच, जम्बू, पलक आदि सप्त द्वीपः भूः भवः, स्वः आदि चौदह लोक तथा अतल, वितल, सुतल आदि सातों पातालों की अन्तर्यामता प्राप्त होती है।नाम सुनने वाले को काल स्पर्श भी नहीं कर सकता।हे नानक ! प्रभु के भक्त में सदैव आनंद का प्रकाश रहता है,परमात्मा का नाम सुनने से समस्त दुखों व दुष्कर्मो का नाश होता है॥ ८॥
परमात्मा का नाम सुनने से ही शिव, ब्रह्मा तथा इन्द्र आदि उत्तम पदवी को प्राप्त कर सके हैं।मंदे लोग यानी कि बुरे कर्म करने वाले मनुष्य भी नाम को श्रवण करने मात्र से प्रशंसा के लायक हो जाते हैं।नाम के साथ जुड़ने से योगादि तथा शरीर के विशुद्ध, मणिपूरक, मूलाधार आदि षट्-चक्र के रहस्य का बोध हो जाता है।नाम सुनने से षट्-शास्त्र, (सांख्य, योग, न्याय आदि), सत्ताईस स्मृतियों (मनु, याज्ञवल्कय स्मृति आदि) तथा चारों वेदों का ज्ञान उपलब्ध होता है।हे नानक ! संत जनों के हृदय में सदैव आनंद का प्रकाश रहता है।परमात्मा का नाम सुनने से समस्त दुखों व दुष्कर्मो का नाश होता है॥ ९ ॥
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